Monday, 25 July 2022

 जिंदगी एक ऐशट्रे हो गयी।

रोज पीता हूँ और बुझा देता हूँ ।

एक आग जो लगी है

वो बुझती नही ,रोज ही बढ़ती है ।

न जाने कितनी खामोशिया सिसक रही है 

इस राख में अभी भी । 

एक दिन तूफान आये और राखो को उड़ा ले जाये 

और बिखेर दे नदियों ,झरनों और खेतों में ।

जिंदगी का अंतिम कस लू और मुस्कुराता देखता रहूँ 

इन सन्नाटो में बिखरे हुए जीवन को  ।

न प्रेम न घृणा न नफरत न बंधन न रिश्ते 

न बेचैनी न खोने का डर न पाने की चिंता।

बस तुम और में और मेरी अंतिम विदाई ।

मैंने अभी देखा नही है तुम्हे गौर से 

पर जानता हूँ तुम मुझे लेने जरूर आओगी एक दिन ।

उस दिन खामोशी के साथ चल दूंगा तेरे साथ ।

बस कुछ निशानिया  पीछे छूट जाएगी

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